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हिमाचल प्रदेश जिला-ऊना


1. जिले के रूप में गठन-1972 ई.

2. जिला मुख्यालय-ऊना

3. जनसंख्या घनत्व (2011 में)-338

4. साक्षरता-86.53% (2011 में)

5. कुल क्षेत्रफल-1540 वर्ग किलोमीटर (2.77%)

6. जनसंख्या-5,21,173 (2011 में) (7.59%)

7. लिंग अनुपात ( 2011 में)-976

8. दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर-16.26% (2011 में)

9. कुल गाँव-814 (आबाद गाँव-758)

10. ग्राम पंचायतें-235

11. विकास खण्ड-5

12. विधानसभा क्षेत्र-5

13. शिशु लिंगानुपात-875 (2011 में)



भौगोल

ऊना हिमाचल प्रदेश के पश्चिम भाग में स्थित है। इसके उत्तर में काँगड़ा, पश्चिम में पंजाब राज्य, पूर्व में हमीरपुर और दक्षिण में बिलासपुर जिले की सीमाएँ लगती हैं। ऊना जिला 31°21' से 31°50' उत्तरी अक्षांश और 76°18 से 76°28° पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है।


पर्वत श्रृंखलाएँ- ऊना जिला हिमालय पर्वत श्रेणी की शिवालिक पर्वतमालाओं के अंचल में बसा है। ऊना को पश्चिम में जस्वां दून की पहाड़ियाँ पंजाब से पृथक करती हैं। ऊना शहर दून के मध्य में स्थित है। ऊना जिले के पूर्व में जस्वाधार या चिंतपूर्णी धार है जिसे हमीरपुर जिले में सोलह सिंगी धार के नाम से जाना जाता है। भरवैन इसकी सबसे ऊँची चोटी है।


नदियाँ- व्यास और सतलुज के बीच बसे ऊना की प्रमुख नदी स्वान है। यह जस्वां घाटी में बहती हुई आनंदपुर साहिब के पास सतलुज नदी में

मिलती है।


इतिहास 

ऊना जिला मुख्यतः जस्वां रियासत और कुटलेहर रियासत के अंतर्गत आता था। पूर्व में दोनों रियासतें काँगड़ा रियासत का हिस्सा थी।


 जस्वाँ रियासत

ऊना जिले का अधिकतर भाग जस्वा गोविंद चंद था। गोविंद चंद के पोते अनिरुद्ध चंद ने दो बार मुगलों के विरुद्ध विद्रोह किया। संसार चंद के आक्रमण के समय जस्वा संसार चंद के कब्जे में आ गया। संसार चंद के विरुद्ध उम्मेद चंद ने गोरखों का साथ दिया था। जस्वाँ रियासत पर सिंह को गिरफ्तार कर अल्मोड़ा भेज दिया गया जहाँ उनकी मृत्यु हो गई। 1879 ई. में उम्मेद सिंह के पोते रणसिंह.ने अपने पुरखों की रियासत के 21 गाँवों पर कब्जा कर लिया था।


कुटलेहर रियासत

कुटलेहर रियासत भी ऊना जिले का स्थापित की। जसपाल के पुत्र और पोते ने भज्जी और कोटी रियासतों की स्थापना की थी। कुटलेहर रियासत के उत्तरी प्रांत चौकी पर 1758 ई. में घमण्ड चंद ने कब्जा कर लिया था। संसार चंद ने 1786 ई. में कुटलेहर पर कब्जा किया जिसे बाद में गोरखो ने आजाद करवाया। वर्ष 1809 ई. में राज्य सिक्खों के अधीन आ गया। कुटलेहर के राजा नारायण पाल ने 1825 ई. में रणजीत सिंह से कौटवालवाह किले के लिए युद्ध किया। कुटलेहर रियासत का अंतिम राजा वृजमोहन पाल था। बेदी विक्रम सिंह ने 1848 ई. में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया। बेदी सुजान सिंह ने ऊना शहर को 1848 ई. में पुनः बेदी शासन के अधीन लाया।

 

स्वतंत्रता संग्राम-ऊना जिले में 19 मई, गिरफ्तार कर लाहौर जेल भेजा गया। बाबा लक्ष्मण दास के पुत्र सत्य प्रकाश बागी, महाशय तीर्थ राम

ओयल, गोपीचंद भार्गव ऊना जिले के स्वतंत्रता सेनानी थे।


जिले की स्थापना-वर्तमान ऊना जिला दर्जा प्रदान किया गया। ऊना शहर की नींव बाबा कलाधारी ने रखी थी।


मेले

ऊना जिले में चिंतपूर्णी मेला, बसौली में पीर निगाहा मेला, मैड़ी में बाबा बड़भाग सिंह मेला प्रसिद्ध है।


अर्थव्यवस्था

ऊना जिले के पेखूबेला में बीज संवर्द्धन फार्म है। औद्योगिक केन्द्र है। ऊना-नंगल रेल लाइन 1991 ई. में बनाई गई। यह ब्रॉड गेज रेल लाइन है।


जनसंख्या आँकड़े

ऊना जिले की जनसंख्या 1901 ई. में जबकि 1971 से 1981 के बीच (21.45%) सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई। ऊना जिले का लिंगानुपात 1911 ई. में 900, 1951 में 936, 1971 में 1003, और 2011 में 976 था। ऊना जिले का लिंगानुपात 1981 में (1028) सर्वाधिक तथा 1911 में (900) न्यूनतम था। ऊना जिले का जनघनत्व 1971 ई. में 178 से बढ़कर 2011 में 338 हो गया है। ऊना जिले में 2001 में 22.44% जो कि 12 जिलों में सर्वाधिक है।


 ऊना जिले का स्थान

ऊना जिला क्षेत्रफल में 10वें स्थान पर है। ऊना (2012 तक) में 1771 किमी. के साथ आठवें स्थान पर थी। ऊना जिला (2011 में) लिंगानुपात में छठे स्थान पर है जबकि शिशु लिंगानुपात में, (2011 में) ऊना (870) 12वें और अंतिम स्थान पर है अर्थात् ऊना जिले का शिशु लिंगानुपात न्यूनतम (2011 में) है। ऊना जिला 86.53% साक्षरता के साथ दूसरे करने वाला जिला है। ऊना जिला (2011-12में) संतरा, माल्टा, अमरूद, पपीता और आँवला उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। सबसे कम कच्ची सड़कों की लम्बाई (170 किमी.) ऊना जिले में है।



सामान्य ज्ञान (हिमाचल प्रदेश)



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