Bilaspur

      हिमाचल प्रदेश जिला-बिलासपुर

1. जिले के रूप में गठन-1 जुलाई, 1954 ई.

2. कुल क्षेत्रफल-1,167 वर्ग कि.मी. (2.10%)

3. कुल जनसंख्या-(2011 में)-3,81,956 (5.56%)

4. जिला मुख्यालय-बिलासपुर

5. जनसंख्या घनत्व-(2011 में)-327

6. लिंगानुपात-(2011 में)-981

7. साक्षरता दर (2011 में)-84.59

8. दशकीय-(2001-2011) जनसंख्या वृद्धि दर-12.05%

9. कुल गाँव-1061 (आबाद गाँव-965)

10, ग्राम पंचायतें-151

11. विकास खण्ड-3

12. विधानसभा क्षेत्र-4

13. शिशु लिंगानुपात (2011 में)-900

14. ग्रामीण जनसंख्या (2011 में)-3,56,930 (93.43%)


 भूगोल

• भौगोलिक स्थिति-बिलासपुर जिला हि.प्र. के दक्षिण पश्चिम में स्थित है। यह 31° 12 30" से 31° 35' 45" उत्तरी अक्षांश और 76° 23 45" से 76°

55' 40" पूर्वी देशांतर के बीच स्थित है। बिलासपुर के पूर्व में मण्डी और सोलन, दक्षिण में सोलन, पश्चिम में पंजाब, उत्तर में हमीरपुर और मण्डी तथा उत्तर पश्चिम में ऊना जिला स्थित है। सतलुज नदी बिलासपुर को दो भागों में बाँटती है।


पहाड़ियाँ धार-बिलासपुर (कहलूर) को सतधार-कहलूर भी कहा गया है। क्योंकि यहाँ सात पहाड़ियाँ हैं।

  1. नैनादेवी पहाड़ी-इस पहाड़ी पर नैनादेवी जी का मंदिर है। कोट कहलूर किला और फतेहपुर किला इसी पहाड़ी पर स्थित है।
  2. कोट पहाड़ी/धार-कोरधार में बछरेटू किला स्थित है।
  3. झाझियार धार-सीर खड्ड इसे 2 भागों में बाँटता है। यहाँ पर गुग्गा गेहड़वी और देवी भडोली का मंदिर है।
  4. तियून धार-तियून किला, पोर बियानू का मंदिर, स्यून किला और नौरंनगढ़ किला इस पहाड़ी पर स्थित है।
  5. बन्दाला धार-यह धार 17 कि.मी. लम्बी है।
  6.  रतनपुर पहाड़ी/धार-इस पहाड़ी पर रतनपुर किला स्थित है जिसमें डेविड ओक्टर लोनी ने गोरखा कमाण्डर अमर सिंह थापा को हराया था। बहादुरपुर पहाड़ी/धार-यहाँ बहादुरपुर किला स्थित है जो 1980 मी. की ऊँचाई पर स्थित होने के कारण बिलासपुर का सबसे ऊंचा स्थान है। बहादुरपुर किला राजा बिजाई चंद का ग्रीष्मकालीन आवास था।




इतिहास

कहलूर रियासत की स्थापना-बिलासपुर पास्ट एण्ड चंदेल बुंदेलखण्ड (मध्य प्रदेश) चन्दरी के चंदेल राजपूत थे। बीरचंद के पिता हरिहर चंद के पाँच पुत्र थे। बीरचंद ने सतलुज पार कर सर्वप्रथम रूहंड ठाकुरों को हराकर किला स्थापित किया जो बाद में कोट-कहलूर किला कहलाया। बीरचंद ने नैणा गुज्जर के आग्रह पर नैना देवी मंदिर की स्थापना कर उसके नीचे अपनी राजधानी बनाई। पौराणिक कथाओं के अनुसार नैना देवी में सती के नैन गिरे थे। राजा वीर चंद ने 12 ठकुराइयों बाघल, कुनिहार, बेजा, धामी, क्योथल, कुठाड, जुब्बल, बघाट, भज्जी, महलोग, मांगल, बलसन) को अपने नियंत्रण में किया।


कहालचन कहालचंद के पुत्र अजयचंद ने हण्डूर रियासत (नालागढ़) को स्थापना की।

 

मेघचंद-मेघचंद को उसके कठोर बर्ताव के कारण जनता ने राज्य छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। मेघचंद ने कुल्लू रियासत में शरण ली और इल्तुतमिश की सहायता से पुनः गद्दी प्राप्त की।


• अभिसंद चंव-अभिसंद चंद सिकंदर लोदी का समकालीन था। उसने तातार खान को युद्ध में हराया था।


सम्पूर्ण चंद-सम्पूर्ण चंद को उसके भाई रतनचंद ने मरवा दिया था।


ज्ञानचंद (1570 ई.)-जानचंद के शासनकाल में कहलूर रियासत मुगलों के अधीन आ गई। ज्ञानचंद अकबर का समकालीन राजा था। ज्ञानचंद ने सरहिन्द क मुगल वायसराय के प्रभाव में आकर इस्लाम धर्म अपना लिया था। ज्ञानचंद का मकबरा आज भी किरतपुर पंजाब में देखा जा सकता है। ज्ञानचंद के 3 बेटों में से 2 ने (राम और भीम) इस्लाम धर्म जबकि बोकचंद ने हिन्दू धर्म को अपनाया।


* बोकचंद ( 1600 ई.)-बोकचंद ने 1600 ई. के आसपास नैना देवी कोटकहलूर से अपनी राजधानी बदलकर सुनहाणी कर ली।


कल्याण चद ( 1630 ई.)-कल्याण चंद ने हण्डूर रियासत की सीमा पर एक किले का निर्माण करवाया जिसके कारण दोनों रियासतों के बीच युद्ध


• बीपचंद (1650-1667 ई.)- दीपचंद ने 1654 ई. में अपनी राजधानी सुनहाणी से बदलकर व्यास गुफा के पास व्यासपुर (बिलासपुर) में स्थानांतरित.की। बिलासपुर शहर की स्थापना 1654 ई. में दीपचंर चंदेल ने की। दीपचंद ने धौलरा महल का निर्माण करवाया। दीपचंद ने “राजा को जब देवा "राणा को राम-राम" और "मियाँ को जय-जय” जैसे अभिवादन प्रथा शुरू करवाई। राजा दीपचंद को "नादौन” में 1667 ई. में कांगड़ा के राजा भोजन में विष देकर मरवा दिया।


• भीमचंच ( 1667 ई. से 1712 ई.)-बिलासपुर (कहलूर) के राजा भीमचंद लगभग 20 वर्षों तक गुरु गोविंद सिंह के साथ परस्पर युद्ध में व्यस्त रहे। गुरु गोविंद सिंह ने 1682 ई. में कहलूर को यात्रा की। कहलूर का राजा 1686 ई. में भगानी साहिब के युद्ध में गुरु गोबिंद से पराजित हुआ था। दोन के बीच 1682 5. 1685 ई. 1666 ई. और 1700 ई. में युद्ध हुआ जिसमें हर बार भीमचंद पराजित हुआ। दोनों के बीच 1701 ई. में शांति सन्धि हुई। गुरु गोविन्द सिंह और भौमचंद ने 1667 ई. में नादौन में मुगलों को सेना को पराजित किया था। भीमचंद की 1712 ई. में मृत्यु हुई।


• अजमेरचंद ( 1712-1741 ई.)-अजमेर चंद ने हण्डूर की सीमा पर अजमेरगड़' किला बनवाया।


देवीचंद ( 1741-78 ई.) राजा देवीचंद ने हण्डूर रियासत के राजा मानचद और उसके पुत्र की मृत्यु के बाद जनता के आग्रह पर स्वयं गद्दी पर न.बैठकर गजे सिंह हण्डुरिया को राजा बनाया। देवीचंद ने 1751 ई. में घमण्ड चंद की युद्ध में सहायता की थी। देवीचंद नादिरशाह का समकालीन था।.देवीचंद ने हादूर के राजा विजय सिंह को रामगढ़ दुर्ग दे दिया था। देवीचंद को नादिरशाह ने बंदी बनाय था।


• महान चंद (1778-1824 ई.)- ई. में गोरखों ने संसार चंद को पराजित किया। बिलासपुर 1803 ई. से 1814 ई. तक गोरखों के अधीन रहा। ब्रिटिश जनरल डेविड ऑक्टरलोनी ने अमर सिंह थापा (गोरखा कमाण्डर) को बिलासपुर के रतनपुर किले में पराजित किया था। बिलासपुर 6 मार्च, 1815 ई. को ब्रिटिश सरकार के अधीन हो गया। 1819 ई. में देसा सिंह मजीठिया ने बिलासपुर पर आक्रमण किया। सन् 1818 ई. में संसारू वजीर को राजा ने नौकरी से निकाल दिया।


• खड़क चंब (1824-1839 ई.)-.को गद्दी सौंप कर वृन्दावन चला गया जहाँ 1857 ई. में उसकी मृत्यु हो गई।


.हीराचंद (1857-1882 ई.)-हीराचंद ने भाग जो भूमि कर के रूप में लिया जाता था वह पैदावार का तीसरा हिस्सा था। अमरचंद (1883-1888 ई.)-अमरचंद के शासन काल में बिलासपुर के गेहड़वी में झुग्गा आंदोलन हुआ। अमरचंद ने 1835 ई. में रियासत के अभिलेख देवनागरी लिपि में रखने व कामकाज देवनागरी लिपि में करने के आदेश पारित किये। इनके कार्यकाल में बिलासपुर में दूम्ह आंदोलन हुए।

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 विजयचंद (1886-1928 ई.)-ब्रिटिश मॉडल पर करने की कोशिश की लेकिन उसे अपने कर्मचारियों का सहयोग नहीं मिला। वर्ष 1903 के आसपास विजयचंद को बिलासपुर रियासत से निर्वासित कर बनारस में रहने का हुक्म दिया गया। राजा को प्रथम विश्व युद्ध में सहायता के लिए अंग्रेजों ने K.C.I.E. तथा मेजर की उसके बाद इन्द्र सिंह और हरदयाल सिंह बजीर बने।

मानद उपाधि प्रदान की। 1931 ई. में बनारस में विजयचंद की मृत्यु हो गई। वर्ष 1909 से 1918 ई. के बीच मियाँ दुर्गा सिंह राज्य का वोर था।


आनंदचंद (1928-1948 ई.)-आनंदचंद अप्रैल 1949 को श्रीचंद छाबड़ा बिलासपुर के दूसरे मुख्य आयुक्त बना ई. में हि.प्र. तथा 1964 ई. में बिहार से राज्यसभा के लिए चुने गए। बिलासपुर का 1 जुलाई, 1954 ई. को हि.प्र. में 5वं जिले के रूप में विलय कर दिया गया। राजा आनंदचंद लोकसभा में निर्विरोध चुने गए। वह 1957


 अर्थव्यवस्था-

दियोली-बिलासपुर में एशिया का सबसे बड़ा ट्राउट है। पुल-बिलासपुर के कंदरौर में एशिया का सबसे ऊँचा पुल है जो 1959 से 1964 ई. के बीच सतलुज नदी पर बना है। इसकी ऊँचाई 80 मीटर है। बिलासपुर में सलापड़ पुल (1960-64 में निर्मित), गमरोला पुल, घाघस पुल (NH-21 पर अलिखड्ड


 मंदिर-

मंदिर बिलासपुर के शाहतलाई में बाबा बालकनाथ मंदिर स्थित है। गुग्गा भटेड़ में गुग्गा मंदिर है। बिलासपुर में गोपाल मंदिर, मुरली मनोहर


मेले-

नलवाड़ी मेला 1889 ई. में डब्ल्यू गोल्डस्टीन ने मैदान में लगने लगा। गुग्गा मेला गेहड़वी में लगता है। बैसाखी मेला हटवार में लगता

है। नगरोन में गुग्गा नवमी मेला लगता है।


 जननाँकीय आँकड़े-

बिलासपुर जिले की जनसंख्या 1901 ई. में 1951 में 948 और 1981 एवं 1991 में सबसे अधिक 1002 दर्ज किया गया। बिलासपुर जिले का जनघनत्व 1901 ई. में 78. 1951 ई. में 107, 1971 ई. में 167, और 2011 में 327 दर्ज किया गया। बिलासपुर जिले में 25.40% अनुसूचित जाति और 2.70% अनुसूचित जनजाति की जनसंस्था निवास पंचायतें, 4 विधानसभा क्षेत्र, 3 विकासखण्ड, 965 आबाद गाँव हैं। बिलासपुर जिले का शिशु लिंगानुपात 2011 में 900 है। 2011 में बिलासपुर जिले का लिंग अनुपात 981 दर्ज किया गया।


 बिलासपुर जिले का स्थान-

क्षेत्रफल के हिसाब से बिलासपुर हि.प्र. का दूसरा सबसे छोटा जिला है जिसका क्षेत्रफल 1,167 वर्ग कि.मी. (2.10%) हैं।. उत्पादन में चौथे स्थान पर था। बिलासपुर जिला जनघनत्व (2011) में तीसरे, आबाद गाँव में आँतवें, लिंगानुपात (2011) में पाँचवें और शिशु लिंगानुपात (2011) में नौवें स्थान पर है।


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