HP Polity Part 4

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 समाज कल्याण

महिला कल्याण से जुड़ी योजनाएँ

नारी सेवा सदन मशोबरा-इस योजना का मुख्य उद्देश्य युवा लड़कियों, विधवा, बेसहारा तथा निराश्रय महिलाएँ तथा जिनको नैतिक खता हो को निःशुल्क आश्रय, खाद्य, कपड़ा, शिक्षा तथा व्यवसायिक प्रशिक्षण देना है। वर्तमान में नारी सेवा सदन मशोबरा में 27 महिलाएं रह रही हैं। महिलाओं को सदन छोड़ने पर पुनर्वास के लिए 20,000१ की आर्थिक सहायता दी जाती है। यदि कोई आवासी शादी करती है तो उसे 51,000 ₹ की आर्थिक सहायता दी जाती है। दिसम्बर, 2017 तक 215.94 लाख र के बजट प्रावधान के विरुद्ध 37.43 लाख लड़कियों के परिजनों/संरक्षकों को उनकी लड़की की शादी के लिए 40,007 का अनुदान दिया जाता है जिनकी वार्षिक आय 35,000 से अधिक न हो। वर्ष 2017-18 में इस उद्देश्य के लिए 482.05 लाख र का उन महिलाओं को आय संवर्धन हेतु प्रदान किए जाते हैं जिनकी वार्षिक प्राय 35,000 ₹ से कम है। इस योजना के अंतर्गत् 8.02 लाख का प्रावधान किया गया। दिसम्बर, 2017 तक 4.05 लाख १ को राशि व्यय करके 81 महिलाओं को लाभान्वित किया गया है।


विधवा पुनर्विवाह योजना-

इस योजना का उद्देश्य विधवाओं को पुनर्विवाह के लिए प्रेरित करके पुनर्वास करना है। इस योजना के अन्तर्गत दम्पति को 50,000 र के रूप में अनुदान दिया जाता है। वर्ष 2017-18 के दौरान इस योजना के अन्तर्गत् 93.90 लाख का बजट प्रावधान किया गया जिसमें से दिसम्बर, 2017 तक 76 दम्पतियों को की आयु कम से कम 18 वर्ष न हो जाए के पालन पोषण हेतु 3000 ₹ प्रति वर्ष प्रति बच्चा सहायता राशि दी जाती है। सहायता केवल दो बच्चों तक ही दी जाती है। इस योजना के अन्तर्गत् वर्ष 2017-18 के लिए 900 करोड़ रन्वित किया गया। बजट का प्रावधान था जिसमें से दिसम्बर 2017 तक 4.10 करोड़ र व्यय किये गए तथा 16,521 बच्चों खरीदने पर कुल लागत के 50 प्रतिशत राशि की प्रति पूर्ति जिनकी अधिकतम सीमा 1,300 ₹ है, उपदान के रूप में उपलब्ध करवाई जाती है। प्रत्येक वर्ष प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में 75 अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति महिलाओं को लाभान्वित करना है, तथा प्रदेश में 5,100 महिलाओं को लाभान्वित किया गया। वर्ष 2017-18 के लिए इस योजना के अन्तर्गत् 66.00 लाख ₹ का बजट प्रावधान रखा गया है। लाभार्थियों के उपलब्ध न होने से व्यय शून्य


विशेष महिला उत्थान योजना-

राज्य सरकार ने ऐसी महिलाओं, जो नैतिक खतरे में हैं, को प्रशिक्षण प्रदान करने तथा उनके पुनर्वास के लिए विशेष महिला उत्थान योजना बतौर 100 प्रतिशत राज्य योजना के रूप में शुरू की है। योजना के अन्तर्गत् महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से ₹3,000 प्रति प्रशिक्षणार्थी प्रति माह की दर से छात्रवृत्ति र 25 प्रति घंटा प्रति प्रशिक्षणार्थी तथा 2800 प्रति प्रशिक्षणार्थी को परीक्षा शुल्क दिया जाता है। चालू वित्त वर्ष में ₹1.21 करोड़ का बजट प्रावधान है जिसमें से दिसम्बर, 2017 तक 39.49 लाख को राशि व्यय की जा चुकी है।




क्षतिपूर्ति करना था ताकि लाभार्थी महिला को गर्भावस्था के अंतिम चरण तक कामकाज न करना पड़े। यह योजना 90:10 के अनुपात में भारत सरकार व राज्य सरकार द्वारा संचालित की जा रही है। इस योजना के अन्तर्गत् मौद्रिक सहायता 6,000 र प्रति लाभार्थी को दो चरणों में देने का प्रावधान था। अर्थात गर्भावस्था के अन्तिम तिमाही के दौरान पहली किस्त तथा प्रसव के तीन माह बाद दूसरी किस्त देना था। 31.05.2017 तक 4964 लाख र को राशि व्यय की गई थी। इस योजना के स्थान पर प्रधानमन्त्री मातृ वंदना योजना (पी.एम.एम.वी.वाई.) शुरू की गई है और

इस योजना को प्रदेश के समस्त जिलों में लागू किया गया है। यह योजना 01.01.2017 से लागू है। इस योजना के मुख्य उद्देश्य-

  1. मजदूरी की क्षति के बदले में नकद राशि को औशिक क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान करना ताकि महिलाएं पहले जीवित बच्चे के जन्म से पहले और बाद में पर्याप्त विश्राम कर सकें।

  2. प्रदान किए गए नकद प्रोत्साहन राशि से गर्भवती महिलाओं एव स्तनपान करवाने वाली माताओं में स्वस्थ रहने के आचरण में सुधार लाना। प्रधानमन्त्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के अन्तर्गत् जच्चा-

और गैर आपातकालीन स्थितियों में प्रदान करना है। हिमाचल प्रदेश में वन स्टॉप सेंटर 26:09.2017 को रेड क्रॉस बिल्डिंग, जोनल हॉस्पिटल सोलन के परिसर में संचालित किया गया है। योजना के अन्तर्गत् 30.01 लाख र आवर्ती और 13.41 लाख र अनावर्ती व्यय का प्रावधान है। दिसम्बर, 2017 तक 15.00 लाख र का व्यय किया गया है तथा 12 महिलाओं को विभिन्न प्रकार की सहायता वन स्टॉप सेन्टर के अंतर्गत प्रदेश में बालिकाओं को विश्वविद्यालय स्तर तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जा रही है।


मातृ शक्ति बीमा योजना- 

यह योजना केवल महिलाओं के लिए है। इस योजना के अंतर्गत् 10 वर्ष से 75 वर्ष तक को महिलाएं जो कि गरीबी रेखा से नीचे हैं लाभ के लिए पात्र हैं। इस योजना में परिवार की बीमागत महिला को मृत्यु या अपंगता जो निम्न प्रकार से हुई हो को राहत के रूप में सहायता राशि प्रदान की जाती है। दुर्घटना से, किसी भी प्रकार की शल्य चिकित्सा के दौरान जैसे कि नसबंदी. प्रजनन के समय किसी में बच्चे के पालन-पोषण हेतु

स्वीकृत किए जाते हैं जबकि 300 र राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सहायता के रूप में बच्चे के पक्ष में स्वीकृत किए जाते हैं जिसे बैंक या डाकघर में सावधि जमा के रूप में जमा किया जाता है और बच्चे द्वारा 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के उपरांत आहरित किया जा सकता है। चालू विल वर्ष में इस योजना के अन्तर्गत 1.88 करोड़ र के बजट के विरुद्ध दिसम्बर 2017 तक 1.09 करोड़ र व्यय किए जा चुके हैं।


समेकित बाल संरक्षण योजना (ICPS)-

कठिन परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों के कल्याण और उन परिस्थितियों में कमी लाने में जिनकी वजह में बच्चे उपेक्षा एवं शोषण के शिकार होते हैं तथा अपने माँ-बाप से अलग हो जाते हैं के लिए इस योजना के अन्तर्गत् बच्चों को अस्थाई आश्रय न के लिए बल्देया (शिमला), सोलन तथा धर्मशाला में तीन आश्रय स्थापित किए गए हैं। किशोर न्याय अधिनियम के क्रियान्वयन हेतु प्रदेश के भी जिलों में किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समितियाँ एवं जिला स्तरीय सलाहकार बोर्ड गठित किए गए हैं। जिला बाल संरक्षण इकाईयाँ सभी जिलों में स्थापित की गई हैं। चाईल्ड लाईन टेलीफोन सेवा 1098 सात जिलों क्रमशः शिमला, कुल्लू, काँगडा, सोलन, मण्डी, चम्बा तथा सिरमौर में स्थापित की गई है। देश में दत्तक ग्रहण को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण का गठन किया गया है। इस वित्तीय वर्ष में इस योजना के अंतर्गत् केन्द्र सरकार द्वारा 18.47 करोड र व राज्य सरकार द्वारा 1.38 करोड़ र आवंटित किये गए हैं, जिसमें से 31.12.2017 तक 14.45 करोड़ र व्यय किए जा चुके है।


समेकित बाल विकास सेवाएँ (ICDS)-

समेकित बाल विकास सेवायें कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश के समस्त विकास खण्डों में 78 समेकित बालविकास परियोजनाओं के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत् प्रदेश में कुल 18,386 आँगनवाड़ी केन्द्रों व 539 मिनी आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों, गर्भवती/धात्री माताओं को सेवायें प्रदान की जा रही है। विभाग द्वारा पोषण एवं स्वास्थ्य, शिक्षाएँ, टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच, विदृष्ठ सेवायें, पाठशाला पूर्व शिक्षा, अनुपूरक पोषाहार के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार के 90:10 के अनुपात में धनराशि उपलब्ध करवाई जाती है। वित्त वर्ष 2017-18 के अन्तर्गत् प्रावधित बजट 21,723.00 लाख ₹ था, जिसमें से 2,172.00 लाख र राज्य का हिस्सा व केन्द्र का हिस्सा 19,551.00 लाख १ है, जिसमें से दिसम्बर, 2017 तक 13,236.66 लाख ₹ व्यय किए गए जिसमें राज्य का हिस्सा 874.69 लाख र तथा केन्द्रीय हिस्सा 12,361.96 लाख १ का था। भारत सरकार द्वारा आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं व मिनी आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रति माह क्रमश: 3,000 र, 1,500 ₹ व 2,250 ₹ का मानदेय निर्धारित किया गया है जिसका 10 प्रतिशत राज्य सरकार और 90

प्रतिशत भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार अपनी 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी के अतिरिक्त क्रमश: 1,450 र, 600 १ तथा 750 1 आँगन वाडी कार्यकर्ता, आँगन बाड़ी सहायिका एवं मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रति माह प्रदान कर रही है।


 पूरक पोषाहार कार्यक्रम (SNP)-

समेकित बाल विकास सेवायें कार्यक्रम के अन्तर्गत् विशेष पोषाहार कार्यक्रम के अन्तर्गत् आँगनवाड़ियों में बच्चों,गर्भवती/धात्री माताओं तथा बी.पी.एल. किशोरियों को निम्नलिखित दरों पर पूरक पोषाहार दिया जा रहा है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत् वर्ष भर में 300 दिनों के लिए पोषाहार दिया जाता है। पूरक पोषाहार की दरें (प्रति लाभार्थी प्रतिदिन) बच्चों को ₹ 6, गर्भवती/धात्री माताओं को ₹ 7, किशोरियों को र 5 तथा अति कुपोषित बच्चों को ₹ 9, तय किए गए हैं। इस कार्यक्रम पर होने वाले व्यय को भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा 90:10

के अनुपात में वहन किया जाता है। चालू वित्त वर्ष में इस कार्यक्रम के अन्तर्गत् 6.80 करोड़ र का राज्य हिस्सा व 61.21 करोड़ र भारत सरकार से अनुदान प्राप्त हुआ है। जिसमें से दिसम्बर, 2017 तक 5.10 करोड़ र राज्य हिस्सा व 39.08 करोड़ र केन्द्रीय हिस्सा व्यय हुआ है व 4.4


दिव्यांग कल्याण


दिव्यांगों के कल्याण की योजनाएँ (दिव्यांग कल्याण)-विभाग दिव्यांगजन के लिए असीम' (सक्षम सशक्तीकरण तथा दिव्यांगजन के लिए मुख्यधारा, नाम से एक विस्तृत एकीकृत योजना मई. 2017 से आरम्भ कर उसका संचालन कर रहा है जिसके मुख्य घटकों की 31.12.2017 तक की भौतिक एवंवित्तीय उपलब्धियों का विवरण निम्न रूप से है-


दिव्यांग छात्रवृत्ति-

इसका मुख्य उद्देश्य सभी तरह की दिव्यांगता जिन में श्रवणदोष, दिव्यांग विद्यार्थी जिनकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत या इससे अधिक है भी शामिल हैं. बिना किसी आयु सीमा के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान करवा रहा है। इस घटक के अन्तर्गत् जो विद्यार्थी छात्रावासों में नहीं रहते हैं उनकी छात्रवृत्ति 500 र से 1,750 ₹ प्रति माह तथा छात्रवास में रहने वाले छात्रों को 1,500 ₹ से 3,000 ₹ तक प्रति माह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। 31.12.2017 तक 108.00 लाख र के बजट में से 82.67 लाख ₹ व्यय किए गए तथा 932 विद्यार्थियों को लाभान्वित किया गया।


दिव्यांग विवाह अनुदान-

सक्षम युवक व युवतियों जिनकी आयु विवाह योग्य है को दिव्यांगजन से विवाह हेतु जिनकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम न हो को प्रोत्साहित करने के आशय से 40 प्रतिशत से 69 प्रतिशत तक 25,000 ₹ तथा 70 प्रतिशत से ऊपर वाले को 50,000 ₹ तक राज्य सरकार द्वारा यदि दोनों दिव्यांग हो तो उन्हें विवाह हो एवं जिला स्तर के शिविरों का आयोजन किया जाता है जिसमें दिव्यांगजन संघ के प्रतिनिधियों,पंचायत प्रतिनिधियों एवं स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को आमंत्रित किया जाता है। इन शिविरों में दिव्यांगजनों के चिकित्सा प्रमाण-पत्र बनाए जाते हैं और विभिन्न यन्त्र एवं सुविधाएँ प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त दिव्यांगजनों के लिए चलाई जा रही विभागीय योजनाओं के बारे में जागरूक किया जाता है। वर्ष 2017-18 में 7.00 लाख 10,000 या परियोजना लागत के 20 प्रतिशत (जो भी कम हो) का उपदान उपलब्ध करवाता है। वर्ष 2017-18 में 31.12.2017 तक निगम द्वारा 36 दिव्यांग व्यक्तियों को 10 करोड़ ₹ के ऋण उपलब्ध करवाये गए।


कौशल विकास-

चयनित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से दिव्यांगजनों को चिन्हित व्यवसायों में व्यवसायिक प्रशिक्षण निःशुल्क दिया जा रहा है और 1,000 र प्रति माह की दर से प्रशिक्षार्थी को छात्रवृत्ति दी जाती है। इस योजना के अन्तर्गत् 10.00 लाख र का बजट प्रावधान किया गये है। चालू वित्तीय वर्ष में 45 दिव्यांग बच्चों को प्रशिक्षण हेतु प्रायोजित किया गया है।


 पुरस्कार योजना-

इस योजना के अन्तर्गत् निजी क्षेत्र में नियोक्ता द्वारा अधिकतम दिव्यांगजनों को रोजगार देने व दिव्यांगता के बावजूद उत्कृष्ट कार्य करने के लिए पुरस्कार देने का प्रावधान है। उत्कृष्ट दिव्यांगजन को 10,000 ₹ व श्रेष्ठ निजी नियोक्ता को 5,000 ₹ के नकद पुरस्कार देने का प्रावधान है। ले रही हैं, जिनका रहन-सहन शिक्षा व चिकित्सा का खर्चा सरकार वहन कर रही है। इस संस्थान के लिए 58.52 लाख ₹ के बजट में से 31.12.2017 तक 41.25 लाख र व्यय हुए है। इसके अतिरिक्त 75.06 लाख र

को राशि रखरखाव हेतु आई.सी.एस.ए. सुन्दरनगर के लिए डी.डब्लयु.ओ. मण्डी को आई.सी.पी.एस. के अन्तर्गत् जारी की गई है। हि.प्र. बाल कल्याण परिषद् द्वारा चलाए जा रहे ढली (शिमला) तथा दाड़ी (काँगड़ा) विद्यालयों के लिए 80.00 लाख र के बजट के विरुद्ध 47.35 लाख र जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त विभाग, प्रेम आश्रम ऊना, आस्था वैलफेयर सोसाईटी नाहन, पैराडाइज चिर्ल्डन केयर सेन्टर चुवाड़ी, आदर्श ऐजुकेशन सोसाईटी कलाथ, कुल्लू, उड़ान रिसपाईट केयर सेन्टर न्यू शिमला में 50 मानसिक रूप से अविकसित बच्चों, 20 मानसिक रूप से अविकसत व्यस्क पुरुषों, 30 व्यस्क मानसिक रूप से अविकसित पुरुष तथा महिलाओं (10 महिला एवं 20 पुरुष), 60 मानसिक रूप से अविकसित वयस्क महिलाओं और 15 मानसिक रूप से अविकसित बच्चों की पढ़ाई, फीस व नि:शुल्क रहन-सहन, भोजन एवं चिकित्सा हेतु 4,500 १ प्रति

आवासी की दर से वहन कर रही है। इस वर्ष 125.00 लाख ₹ का बजट प्रावधान था तथा 31.12.2017 तक 33.66 लाख ₹ की राशि व्यय को जा चुकी है।


 दिव्यांगता पुनर्वास केन्द्र-

प्रदेश में एन.पी.आर.पी.डी. के तहत हमीरपुर व धर्मशाला में दो दिव्यांगता पुनर्वास केन्द्र स्थापित हैं जो कि क्रमशःग्रामीण विकास अभिकरण, हमीरपुर व भारतीय रैडक्रॉस सोसाइटी, धर्मशाला द्वारा चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2017-18 में 15.00 लाख ₹ का बजट प्रावधान है।



 गृह अनुदान-

इस योजना के अन्तर्गत् अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, दिव्यांग, विधवा/बेसहारा/एकल नारी के प्रति परिवार जिनकी वार्षिक आय 35,000 ₹ से अधिक न हो, को 1,30,000 र प्रति परिवार आवास निर्माण हेतु 25,000 आवास मुरम्मत हेतु दिये जा रहे हैं। वर्ष 2017-18 में 17.50 करोड़ ₹ के बजट प्रावधान से 1,346 व्यक्तियों को 31.12.2017 तक 13.51 करोड़ र की राशि प्रदान कर लाभान्वित किया गया है।प्रशिक्षण ग्रहण करने के पश्चात् अभ्यार्थी को छ: माह के लिए विभिन्न कार्यालयों में कम्प्यूटर दक्षता हासिल करने के लिए रखा जाता है। इस अवधि में अभ्यार्थी को 1,500 ₹ प्रति माह तथा 1,800 ₹ प्रति माह दिव्यांग अभ्यार्थियों को राशि दी जाती वर्ष 2017-18 के लिए 4.54 करोड़ ₹ का बजट प्रावधान

रखा गया है जिसमें से 31.12.2017 तक 1.98 करोड़ र व्यय किए गए तथा 2,998 प्रशिक्षणार्थियों के लक्ष्य के विरुद्ध 1,905 प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित किया गया।तथा चमड़ा कार्य के लिए औजार खरीदने हेतु 1,300 ₹ तथा सिलाई मशीनें खरीदने के लिए से 1,800 ३ प्रति लाभार्थी को सहायता दी जाती है। वर्ष 2017-18 में इस योजना के अन्तर्गत् 1.36 करोड़ ₹ बजट का प्रावधान रखा गया तथा 88.40 लाख १ को राशि 31.12.2017 तक व्यय की गई जिससे 7,527 लाभार्थियों में से 4,784 लाभार्थी लाभान्वित हुए।

जाति, अनुसूचित जन जाति के उन परिवारों को वित्तीय राहत दी जाती है जिन पर अन्य समुदाय कलोगों द्वारा जाति के आधार पर अत्याचार किए जाते हैं। अत्याचार से पीड़ित व्यक्ति को 1.00 लाख र से 825 लाख र तक की राहत राशि प्रदान की जाती है जो कि अत्याचार के प्रकार पर निर्भर है। वर्ष 2017-18 में उक्त योजना के अन्तर्गत् 50.00 लाख र का बजट प्रावधान किया गया है तथा 31.12.2017 तक 20.60 लाख र की राशि व्यय करके 24 पीड़ित व्यक्तियों लाभान्वित किया गया। में आर्थिक विकास का दृष्टिकोण क्षेत्रीय आधार पर नहीं है जबकि जन-जातीय उप योजना क्षेत्रीय आधार पर है। जिला बिलासपुर कुल्लू, मण्डी, सोलन, शिमला और सिरमौर अनुसूचित जाति अधिकता वाले जिले हैं। जहाँ अनुसूचित जातियों की जनसंख्या राज्य औसत से अधिक है। राज्य में इन छ: जिलों में कुल अनुसूचित जाति जनसंख्या का 61.09

प्रतिशत है। अनुसूचित जाति उपयोजना की आवश्यकता के अनुरूप एवं प्रभावी बनाने योजना के कार्यान्वयन एवं निगरानी/अनुश्रवण के लिए इकहरी प्रशासनिक प्रणाली शुरू की है। सभी जिलों को निर्धारित मापदण्डों के आधार पर बजट आवंटित किया गया है जो दूसरे जिलों के लिए नहीं बदला जा सकता। प्रत्येक जिला में जिलाधीश इस योजना के कार्यान्वयन से संबंधित विभागों/क्षेत्रीय विभागों के अधिकारियों के परामर्श से जिला स्तरीय योजनाएँ तैयार करते हैं।

  1. अनुसूचित जातियों के कल्याण से संबंधी सभी कार्यक्रमों को प्रभावी तौर पर कार्यान्वित किया गया है। यद्यपि अनुसूचित जाति समुदाय के लोग सामान्य योजना एवं जन-जाति उप-योजना में भी लाभान्वित हो रहे हैं फिर भी विशेष तौर पर व्यक्तिगत लाभ के कार्यक्रम और अनुसूचित बहुल्य गांवों में आधारभूत संरचना के विकास के लिए विशेष लाभकारी कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। राज्य योजना के कुल बजट का 25.19 प्रतिशत अनुसूचित उप-योजना के लिए अलग से प्रावधान किया गया है। सरकार अनुसूचित जाति के परिवारों को रोजगार प्रदान व उनकी आय में वृद्धि करने के लिए अधिक से अधिक वास्तविक योजनाएँ तैयार करके विशेष प्रयास कर रही है।

  2.  अनुसूचित जाति उप-योजना के लिए डिमांड-32 में अलग उप-शीर्ष '789' बनाया है। ताकि इस निधि को एक योजना से दूसरी योजना के अन्तर्गत् आप्तानी से स्थानान्तरित किया जा सकेगा। इस उप-योजना के अन्तर्गत् 100 प्रतिशत बजट प्रयोग करना सुनिश्चित बनाया जा सकेगा। वर्ष 2017-18 में अनुसूचित जाति उप योजना में राज्य योजना के अन्तर्गत 1,436.83 करोड़ र व्यय किये जा रहे हैं तथा वर्ष 2018-19 में अनुसूचित जाति उप-योजना के अन्तर्गत् अनुसूचित जातियों के कल्याण हेतु 1,586.97 करोड १ बजट प्रस्तावित है।

  3. जिला स्तर पर जिला स्तरीय समीक्षा एवं कार्यान्वयन कमेटी गठित की गई है। जिसके अध्यक्ष सम्बन्धित जिला से मन्त्री तथा उपाध्यक्ष जिलाधीश होता है। जिला परिषद् का चेयरमैन और खण्ड विकास समिति के सभी चेयरमैन और अन्य स्थानीय प्रसिद्ध व्यक्ति इस कमेटी के गैर सरकारी सदस्य और अनुसूचित जाति उप-योजना से सम्बन्धित सभी अधिकारी सरकारी सदस्य होते हैं। राज्य स्तर पर मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार, प्रशासनिक सचिवों के साथ त्रैमासिक समीक्षा बैठकें आयोजित करते हैं। इसके अतिरिक्त माननीय मुख्य मन्त्री की अध्यक्षता में अनुसूचित जाति कार्य निष्पादन के लिए उच्च अधिकार प्राप्त समन्वय एवं समीक्षा समिति बनाई गई है जो कि अनुसूचित जाति उप-योजना की समीक्षा वर्ष में एक बार करती है।


विभाग के सर्वेक्षण के अनुसार हिमाचल प्रदेश में 95,772 अनुसूचित जाति परिवार गरीबी रेखा से नीचे हैं। वर्ष 2016-17 में 37916 अनुसूचित जाति परिवारों के लक्ष्य की तुलना में 47,633 अनुसूचित जाति परिवारों को लापाका किया गया। वर्ष 2017-18 में 2.038 अनुसूचित जाति के परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।



सामाजिक सुरक्षा पेंशन की योजनाएँ

देख रेख/पालन पोषण का उचित साधन न हों व जिनको वार्षिक आय 35,000 र से अधिक न हो को 700 ₹ प्रति माह पैंशन दी जाती है। 80 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धों और शनरों को बिना किसी आय सीमा के 1,250 ₹ प्रति माह की दर से पैंशन दी जा रही है। है। इसके अतिरिक्त 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को 1,250 ₹ प्रति माह की दर से बिना किसी आय सीमा के पैशन प्रदान की जा रही है बशर्ते कि वे किसी सरकारी/गैर सरकारी बोर्ड व निगम में कार्यरत न हो तथा किस अन्य प्रकार की पैशन प्राप्त न कर रहा हो। वृद्धावस्था तथा दिव्यांग भत्ता हेतु चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 में 2,14,608 पैंशनरों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन योजनाओं हेतु 225.98 करोड़ र के बजट प्रावधान में से 31.12.2017 तक 178.44 करोड़ र व्यय किए जा चुके हैं।था उनकी वार्षिक आय 35,000 ₹ से अधिक न हो, इनको भी 700 ₹ प्रति माह पैंशन दी जाती है। इस योजना हेतु चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 में 80580 पैशानरों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा 120.54 करोड़ ₹ के बजट प्रावधान में से 31.12.2017 तक 76.45 करोड़ र व्यय किए जा कुकभी आयु एवं आय सीमार नहीं है) ऐसे कुष्ठ रोगियों को 700 ₹ प्रति माह कुष्ठ रोगी पुनर्वास भत्ता दिया जाता है। इस योजना हेतु चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1,482 पेंशनरों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा 1.23 करोड़ र के बजट प्रावधान में से 31.12.2017 तक 75.79 लाख ₹ व्यय किए जा चुके हैं।रिवारों के सभी सदस्य पात्र हैं। इस योजना हेतु चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 में 94,120 पैंशनरों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा 4341रोड़ ₹ के बजट प्रावधान में से 31.12.2017 तक 34.83 करोड़ ₹ व्यय किए जा चुके हैं।22,020 पैंशनरों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है तथा  10.55 करोड़ ₹ के बजट प्रावधान में से 31.12.2017 तक 7.72 करोड़ ₹ व्यय किए जा चुके हैं।

हैं। शेष राशि वृद्धावस्था पेंशन हेतु प्रति माह 5001

व 80 वर्ष से अधिक आयु वालों को 750 ₹ तथा विधवा पेंशनरों हेतु 400 ₹ प्रति पैंशनर की दर से व सेवा शुल्क प्रदेश सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है जिसका बजट प्रावधान राज्य वृद्धावस्था तथा विधवा पेंशन योजना के बजट में किया गया है ताकि सभी प्रकार के पैंशनरों को एक सामान की दर से 700 ₹, 80 वर्ष से कम प्रति माह व 80 वर्ष तथा उससे अधिक आयु के पेंशनरों को 1,250 र प्रति माह की दर से पैंशन प्राप्त हो सके। इसी प्रकार इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के अन्तर्गद् प्रदेश सरकार 950 र प्रति माह प्रति पैंशनर की दर से व सेवा शुल्क वहन कर रही है जिसका बजट प्रावधान राज्य दिव्यांग पेंशन योजना के बजट में किया गया है ताकि 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले सभी पैंशनरों को एक सामान की दर से 1,250 ₹ प्रति माह की दर से पैंशन प्राप्त हो सके। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, हिमाचल प्रदेश का मुख्य लक्ष्य अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़े वर्गों, वृद्धों एवं बेसहारा. शारीरिक रूप से दिव्यांग बच्चा, 0-6 वर्ष के बच्चों, महिलाओं, विधवाओं तथा गरीब व महिलाओं जो नैतिक खतरे में हों, की सामाजिक कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत परियोजना कार्यान्वित कर है।



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